इसमें कहा गया है कि इस परियोजना को अप्रैल 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य है, जिसका उद्देश्य धन तक त्वरित पहुंच की सुविधा प्रदान करना, निकासी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और सेवा दक्षता में वृद्धि करना है।
परियोजना प्रगति पर: स्थिति क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्र ने कहा कि ईपीएफओ सॉफ्टवेयर गड़बड़ियों को दूर करने के लिए काम कर रहा है। यदि लागू किया जाता है, तो आठ करोड़ सदस्यों को लाभ होगा, क्योंकि वर्तमान में उन्हें अपने ईपीएफ पैसे तक पहुंचने के लिए समय लेने वाली निकासी दावा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
ईपीएफओ स्वयं एक बैंक के रूप में कार्य क्यों नहीं कर सकता?
रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्र ने बताया कि ईपीएफओ सदस्यों को सीधे पैसे निकालने की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि उसके पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं है।
COVID-19 महामारी के दौरान शुरू की गई ऑटो-सेटलमेंट प्रक्रिया में भी सदस्यों को अग्रिम दावे दाखिल करने की आवश्यकता होती है। संस्था सालाना 5 करोड़ से अधिक दावों का निपटारा करती है, जिनमें से ज्यादातर ईपीएफ निकालने के हैं।
सरकार दक्षता में सुधार के लिए काम कर रही है। ईपीएफओ के शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय, केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने 13 अक्टूबर 2025 को उपयोगकर्ताओं के लिए सरलीकरण और आंशिक निकासी को उदार बनाया। इससे उपयोगकर्ताओं को तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्मचारी और नियोक्ता के हिस्से सहित 100% योग्य धनराशि (75% कुल धनराशि) निकालने की अनुमति मिली।
इसके अलावा, उसी महीने, सीबीटी ने पांच साल की अवधि के लिए ईपीएफओ के ऋण पोर्टफोलियो का प्रबंधन करने के लिए चार फंड मैनेजरों – एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, एचडीएफसी एएमसी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी और यूटीआई एएमसी को भी मंजूरी दे दी।

