बुधवार को जारी एक परामर्श पत्र में, बाजार नियामक ने कहा कि म्यूचुअल फंड में तीसरे पक्ष के भुगतान को कुछ परिदृश्यों में अनुमति दी जा सकती है जैसे नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारी लाभ का भुगतान और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) द्वारा वितरकों को कमीशन का भुगतान।
यह प्रस्ताव मौजूदा नियमों से हटकर है, जिसके लिए आवश्यक है कि डिजिटल ट्रेल के रखरखाव को सक्षम करने के लिए सभी म्यूचुअल फंड लेनदेन निवेशक के सत्यापित बैंक खातों के साथ होने चाहिए। नियम, जो धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के अनुसार हैं, एएमसी के बीच तीसरे पक्ष के भुगतान जोखिमों को कम करने के लिए बनाए गए थे।
बाजार नियामक ने उन कर्मचारियों के लिए नियोक्ताओं द्वारा भुगतान कटौती की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है, जिन्होंने बचत के साधन के रूप में म्यूचुअल फंड को चुना है। यह विकल्प सभी सूचीबद्ध और ईपीएफओ-पंजीकृत कंपनियों और स्वयं एएमसी के लिए उपलब्ध होगा।
मसौदा पत्र में नियामक ने कहा, “यह तंत्र एएमसी को वेतन कटौती के माध्यम से म्यूचुअल फंड निवेश के लिए समेकित भुगतान स्वीकार करने की अनुमति देगा।”
नियामक ने मसौदा नियमों पर 10 जून तक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
म्यूचुअल फंड द्वारा अपने पैनल में शामिल वितरकों को कमीशन के भुगतान के उद्देश्य से तीसरे पक्ष के भुगतान की भी अनुमति है। प्रावधान एएमसी को कर्मचारियों के वेतन कटौती के समान प्रणाली में, अपने वितरकों को नकद के बजाय म्यूचुअल फंड इकाइयों के रूप में भुगतान करने की अनुमति देता है।
म्यूचुअल फंड इकाइयां केवल वितरक के नाम पर आवंटित की जाती हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वास्तविक लाभार्थी को निवेश लाभ प्राप्त हो। केवल एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) द्वारा पंजीकृत एएमसी योजनाएं बेचने वाले वितरक ही इस विकल्प का लाभ उठा सकते हैं। एएमसी और आरटीए (रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट) को भी उचित केवाईसी सत्यापन का पालन करना चाहिए, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों का अनुपालन बनाए रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी लाभांश या मोचन आय केवल लाभार्थी के खाते में जमा की जाएं।
प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को विनियमित और पारदर्शी तरीके से म्यूचुअल फंड के माध्यम से सामाजिक कार्यों में योगदान करने में मदद करना भी है। निवेशक अब सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध शून्य कूपन शून्य प्रिंसिपल उपकरणों के माध्यम से सत्यापित गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ) को अपनी निवेश राशि, लाभांश या मोचन आय का एक हिस्सा दान कर सकते हैं।
म्यूचुअल फंड उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि एएमसी के पास पहले योजनाएं और कमीशन भुगतान तंत्र थे जो तीसरे पक्ष के भुगतान को सक्षम करते थे। पेपर अब इन्हें एक स्पष्ट रूपरेखा के साथ औपचारिक रूप देता है।
क्वांटम म्यूचुअल फंड के प्रबंध निदेशक जिमी पटेल ने कहा, “कर्मचारियों को उनकी बचत के लिए भुगतान करने का नियम गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसी कंपनियों में संगठित निवेश की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, सामाजिक कारणों में योगदान की सिफारिश, हालांकि नेक इरादे से की गई है, प्रतिबंध लगा सकती है क्योंकि कई एनजीओ स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध नहीं हैं और कई एनजीओ ने ZCZP (शून्य कूपन, शून्य प्रिंसिपल) उपकरण जारी नहीं किए हैं।”
सोशल स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) शून्य कूपन, शून्य मूलधन उपकरणों के माध्यम से धन जुटाते हैं, जो न तो ब्याज का भुगतान करते हैं और न ही परिपक्वता पर मूलधन लौटाते हैं।
यह ढांचा भरोसेमंद एनजीओ की स्वतंत्र रूप से पहचान करने की कठिनाई को कम करता है और बेहतर पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। म्यूचुअल फंड या तो दान के लिए समर्पित योजनाएं बना सकते हैं या सभी मौजूदा योजनाओं को यह सुविधा प्रदान करने की अनुमति दे सकते हैं।

