Thursday, October 8, 2026

Using credit card to buy property in Dubai lands may land you in trouble: Report

Date:

कई भारतीय दुबई में संपत्ति खरीदने के लिए अपने क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने के बाद खुद को एक मुश्किल स्थान पर पा रहे हैं, सूचित आर्थिक समय। क्या लग रहा था कि एक आसान तरीका कानूनी और कर समस्याओं के लिए घर वापस आ रहा है।

कुछ होमबॉयर्स ने या तो दुबई-आधारित बिल्डरों द्वारा साझा किए गए भुगतान लिंक की जाँच की या जब वे दुबई का दौरा कर रहे थे, तो क्रेडिट कार्ड स्वाइप किया। उन्होंने इसे बिना किसी कागजी कार्रवाई के परेशानी से मुक्त पाया और बैंक की कोई यात्रा नहीं की। और उनका मानना था कि वे विदेशी प्रेषण पर स्रोत (टीसीएस) पर एकत्र किए गए 20 प्रतिशत कर का भुगतान कर सकते हैं।

लेकिन जो अज्ञात है, वह यह है कि क्रेडिट कार्ड, यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय भी, केवल चालू खाता लेनदेन के लिए होते हैं, जैसे कि होटल बुकिंग, फिल्में, या किताबें खरीदना, न कि कैपिटल अकाउंट लेनदेन के लिए, जैसे कि संपत्ति खरीदना।

जबकि कोई कानून विदेशों में संपत्ति खरीदने के लिए क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर प्रतिबंध नहीं लगाता है, विशेषज्ञों का मानना है कि यह आरबीआई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करता है।

अब आयकर क्रैकडाउन या प्रवर्तन निदेशालय पर चिंतित हैं, इनमें से कुछ खरीदार अपनी गलती को ठीक करने के लिए दौड़ रहे हैं। वे अब उदारवादी प्रेषण योजना (LRS) के तहत ठीक से पैसा दे रहे हैं और डेवलपर्स को पहले के क्रेडिट कार्ड भुगतान को रद्द करने के लिए कह रहे हैं। एक बार जब नया भुगतान सही बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किया जाता है, तो बिल्डर पहले की राशि को वापस कर देता है।

LRS क्या है?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के नियमों के अनुसार, एक भारतीय निवासी संपत्ति खरीदने के लिए या एलआरएस के तहत व्यक्तिगत उपयोग के लिए विदेशों में $ 250,000 प्रति वर्ष भेज सकता है। हालांकि, भुगतान को उचित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से मार्ग होना चाहिए, और व्यक्ति को कैपिटल अकाउंट लेनदेन के प्रेषण से पहले न्यूनतम एक वर्ष के लिए बैंक के साथ एक खाता आयोजित किया जाना चाहिए।

एक क्रेडिट कार्ड, जब संपत्ति के लिए भुगतान करने के लिए उपयोग किया जाता है, तो LRS के तहत नहीं गिना जाता है और इसे उल्लंघन माना जाता है।

इस तथ्य के बावजूद कि क्या आरबीआई इस तरह के लेनदेन की अनुमति देता है, विदेशों में खरीदी गई एक संपत्ति को आयकर अधिनियम की धारा 206C (1G) (ए) के लिए LRS के तहत लेनदेन के रूप में देखा जाता है, और इसलिए 20 प्रतिशत के अधीन है

सभी व्यक्तिगत वित्त अपडेट के लिए, यात्रा करें यहाँ

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

RBI Bulletin says Indian economy remains resilient but global risks are rising

India’s economy remains resilient despite a worsening global backdrop,...

12 years of Make in India: What worked, what’s unfinished and what comes next

India has made visible gains in manufacturing over the...

Why India did not sign an FTA with China, according to Piyush Goyal

India had signed trade agreements with economies such as...

EU regulations could push up costs and hurt European businesses, Piyush Goyal says

Commerce and Industry Minister Piyush Goyal has warned that...