यूआईडीएआई ने सोशल मीडिया पर कहा कि आधार का उद्देश्य प्रमाणीकरण के साथ उपयोग किए जाने पर पहचान के प्रमाण के रूप में काम करना है। हालाँकि, इसे जन्मतिथि का प्रमाण नहीं माना जाता है।
एक विस्तृत स्पष्टीकरण दस्तावेज़ में, यूआईडीएआई ने कहा कि आधार अधिनियम, 2016, “जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में इसकी स्वीकृति के संबंध में चुप है”।
इसलिए, यूआईडीएआई के निदेशक, संजीव यादव द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, “आधार में जन्म तिथि की शुद्धता के संबंध में विवाद की स्थिति में, प्रमाण का भार आधार संख्या धारक पर है।”
नोटिस में कहा गया है कि जन्मतिथि स्थापित करने से संबंधित उद्देश्यों के लिए आधार के उपयोग पर अपना दृष्टिकोण निर्धारित करना सभी आधार उपयोगकर्ता एजेंसियों (एयूए) और ई-केवाईसी उपयोगकर्ता एजेंसियों (केयूए) पर निर्भर है।
जबकि अधिनियम जन्मतिथि प्रमाण पर चुप है, “यह प्रमाणीकरण प्रश्नों के लिए जन्म तिथि सहित जनसांख्यिकीय जानकारी के संग्रह, अद्यतन और रखरखाव के लिए प्रदान करता है,” दस्तावेज़ ने स्पष्ट किया।
आधार का आधिकारिक उपयोग क्या है?
यूआईडीएआई के सहायक महानिदेशक अशोक कुमार ने एक अलग ज्ञापन में कहा, “आधार केवल इस तथ्य का प्रमाण है कि जो व्यक्ति आधार संख्या के आधार पर अपनी पहचान बनाकर सब्सिडी/सेवा प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है, वह वही व्यक्ति है जिसने अपने नामांकन के समय अपने बायोमेट्रिक्स और अन्य दस्तावेज प्रदान करने के बाद आधार के लिए नामांकन किया था।”
यूआईडीएआई के अनुसार, आधार कार्ड के आधिकारिक उपयोग हैं:

