Tuesday, October 27, 2026

EPFO News: Retirement body may hike wage ceiling to ₹25,000, says report — What does it mean for you?

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ईपीएफओ नया नियम: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) कथित तौर पर वेतन सीमा पर विचार कर रहा है ₹कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में श्रमिकों को अनिवार्य रूप से शामिल करने के लिए 25,000 रु. मोनेकॉंट्रोल सूत्रों के हवाले से खबर है.

एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि ईपीएफओ का केंद्रीय न्यासी बोर्ड अपनी अगली बैठक में इस मामले पर चर्चा कर सकता है, जो दिसंबर या जनवरी में होने की उम्मीद है। मोनेकॉंट्रोल कहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैठक में नए ईपीएफओ नियम को अंतिम मंजूरी दी जा सकती है।

लाइवमिंट रिपोर्ट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका। यदि सरकार या ईपीएफओ इस संबंध में कोई बयान जारी करता है तो यह लेख अपडेट किया जाएगा।

वर्तमान ईपीएफओ वेतन सीमा है ₹15,000 प्रति माह.

न्यूज आउटलेट के हवाले से अधिकारी के मुताबिक, नए ईपीएफओ नियम से 10 मिलियन अतिरिक्त कर्मचारियों को फायदा हो सकता है।

“श्रम मंत्रालय के आंतरिक मूल्यांकन के अनुसार, ₹वेतन सीमा में 10,000 प्रति माह की वृद्धि से 10 मिलियन से अधिक व्यक्तियों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ अनिवार्य हो जाएगा।” मोनेकॉंट्रोल अधिकारी के हवाले से खबर दी गई है.

अधिकारी ने आगे कहा कि मेट्रो शहरों में कई कर्मचारियों को इससे ज्यादा वेतन मिलता है ₹15,000 मूल वेतन, जो उनके लिए ईपीएफओ सदस्य बनना वैकल्पिक बनाता है।

रिपोर्ट में व्यक्ति का हवाला देते हुए कहा गया है, “श्रमिक संघ लंबे समय से (वेतन सीमा पर) बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं क्योंकि कई मेट्रो शहरों में कई कम या मध्यम-कुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 15,000 प्रति माह से अधिक है। उच्च सीमा उन्हें ईपीएफओ का हिस्सा बनाएगी।”

ईपीएफओ वेतन सीमा क्या है?

ईपीएफओ वेतन सीमा अधिकतम मासिक मूल वेतन है जिस पर अनिवार्य पीएफ योगदान और ईपीएस की गणना की जाती है, और यह सेवानिवृत्ति निधि निकाय द्वारा शासित होती है।

जो कर्मचारी इससे अधिक कमाते हैं ₹मूल वेतन के रूप में 15,000 ईपीएफ और ईपीएस योजनाओं से बाहर निकल सकते हैं। नियोक्ता के पास भी ऐसे कर्मचारियों को पंजीकृत करने और उनके लिए पीएफ योगदान देने का अधिकार नहीं है।

यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन है ₹15,000 या उससे कम, उसे ईपीएफ और ईपीएस के तहत नामांकित होना चाहिए। नियोक्ता और कर्मचारी को अपने वेतन का 12 प्रतिशत पीएफ (भविष्य निधि) के रूप में योगदान करना होगा।

ईपीएफओ के नए नियम

इस महीने की शुरुआत में, सेवानिवृत्ति निकाय ईपीएफओ ने अपने सात करोड़ से अधिक ग्राहकों के लिए उदारीकृत आंशिक निकासी को मंजूरी दी थी।

सदस्यों के खाते में योगदान का 25 प्रतिशत सदस्य द्वारा हर समय बनाए रखने के लिए न्यूनतम शेष राशि के रूप में निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है।

बाकी 75 फीसदी रकम कर्मचारी निकाल सकते हैं.

ईपीएफओ ने ईपीएफ के समय से पहले अंतिम निपटान का लाभ उठाने की अवधि को मौजूदा 2 महीने से बदलकर 12 महीने और अंतिम पेंशन निकासी की अवधि को 2 महीने से बदलकर 36 महीने करने का निर्णय लिया है।

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